विकाश वाद का सिद्धान्त प्रतिवादन
करके इतिहास पुरुष बने
हुए डार्विन स्कुल मे अत्यन्त सामान्य विद्द्यार्थी के रुप मे जाने जाते थे लेकिन जीव
जन्तु के अध्यापन और अवलोकन मे ज्यादा रमण करते थे / खालि पशु पक्षी मे ही केन्द्रित होना इस आदत को उनके पिता ने भी
ठीक नही माना उनके इस काम को / इसिलिए एकदिन उनका पिताजी ने उनका विरोध किया -- ठीकठाक
कामकाज मे तुम्हारा वास्ता नही है केवल कुत्तो , बिल्ली से खेलना हि जाना है / उनके
पिता ने उनको डाक्टरी कराने कि कोशिश की परन्तु
उन्होने नही माना और उनका इच्छा जिस विषय मे रहा उसीमे लगे रहे जिन्दगी भर / परिणामस्वरूप
वे अपनी सफलता की उचाई मे पहुँचे /अतः अपना इच्छा को शिक्षा और करियर बनाने पर धयान
दे तो जो कोई भी अत्यन्त सफल होते हैं /
प्रतिभा न हो तो क्या हुआ, प्रतिज्ञा तो कीजिये /
लुइपाश्चर
पागल कुत्तो के काटने पर इन्जेक्सन
का पता लगाने वाले लुइपाश्चर कलेज पहुचने तक भी सामान्य विद्द्यार्थी थे/ २२ विध्यार्थी के समूह मे उनका
स्थान १५ आँ था /
उस वक्त कुत्ता के काटने पर उपचार
के रुप मे लोहा को लाल कर उस से ही दागा (ईलाज ) जाता था उपचार विधि मे / इसप्रकार
के दृस्य ने उनको मर्माहत किया तभी उन्होने पर्तिज्ञा किया कि आइन्दा ऐसा इलाज का कुत्ता
के काटने वाले के लिय औसधी खोज्ने कि भीष्म ---प्रतिज्ञा किया / देखते ही देखते एक
सामान्य विधार्थी कि प्रतिभा विस्फोट हुआ / अतः प्रतिभा न हो तो चिन्ता कि कोइ बात
नही करे / जैसी भी क्षेत्र मे हो या लगे हो तो भी
एक भिस्म --प्रतिज्ञा तो जरु करे करना
जरुर चाहिय /

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