Saturday, August 27, 2016

प्रतिभा न हो तो क्या हुआ, प्रतिज्ञा तो कीजिये / लुइपाश्चर

पागल कुत्तो के काटने पर इन्जेक्सन का पता लगाने वाले लुइपाश्चर कलेज पहुचने तक भी सामान्य  विद्द्यार्थी थे/ २२ विध्यार्थी के समूह मे उनका स्थान १५ आँ  था /

उस वक्त कुत्ता के काटने पर उपचार के रुप मे लोहा को लाल कर उस से ही दागा (ईलाज ) जाता था उपचार विधि मे / इसप्रकार के दृस्य ने उनको मर्माहत किया तभी उन्होने पर्तिज्ञा किया कि आइन्दा ऐसा इलाज का कुत्ता के काटने वाले के लिय औसधी खोज्ने कि भीष्म ---प्रतिज्ञा किया / देखते ही देखते एक सामान्य विधार्थी कि प्रतिभा विस्फोट हुआ / अतः प्रतिभा न हो तो चिन्ता कि कोइ बात नही करे / जैसी भी क्षेत्र मे हो या लगे हो तो भी  एक  भिस्म --प्रतिज्ञा तो जरु करे करना जरुर चाहिय /



लगातार निरन्तर लगे रहने पर असफल कोहि भी नही होता है / 
                                           
                                             थोमस एल्वा एडिसन

बिजली चिम शिशा लगायत एक हजार ९३ नब्बे जितना बैज्ञानिक आविस्कार करने वाले एडिसन ने एक भी  कालेज पढ ने पाया/ स्कूल मे वे मेधावी विद्यार्थी भी  नही थे एसा सुनकर जो भी चकित होगा / उनका टिचरो का टिप्पणी यहा तक किया की एडिसन अतिमुर्ख है त भी तो कोइ भी सिखाना नही चाहते/ इसिलिय वे तिन महिना तक स्कूल ही नही गए, लेकिन  उनके ममी ने उनको घरमे ही पढ़ाया /


रूचि से  आदमी महान बनता है /
            
                 सर आइज्याक न्यूटन

विज्ञान में सबसे ज्यादा १०  हस्ती मध्य में एक है ----न्यूटन / जबकि वे स्कूल में मात्र २ बर्ष  अध्यन कर पाए / उस समय तक भी उनका प्रतिभा का कोई पता नहीं था / वे सामान्य एक बिद्यार्थी थे / उनका रूचि खास पढाई के बिपरीत प्रकृति के रहस्य में केन्द्रित था / तभी तो वे छोटे उम्र में ही घाम का घडी , पानी का घडी , हवा से चलने वाले मील बनाने में  लगे रहे / अतः पढाई नही अपितु रूची को अनुसरण करके एक महान बैज्ञानिक बने / आप का क्या विचार है /अपनी रूची में विस्फोठ   कर सकते है ?
दूसरे आदमी मुझको एक प्रतिभावान मानते है पर मई अपने को धैर्यवान मानता हूँ, क्योकि मेरा सभी प्रतिभा धैर्य से ही बने है , इसीलिए मई अपने को प्रतिभावान कम और ज्यादा धैर्यवान समझता हूँ /

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